इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

शनिवार, 29 नवंबर 2014

नवंबर 2014 से फरवरी 2015

सम्पादकीय
सिर्फ लेखन के लिए ही बहाना क्‍यों

आलेख 
खुदमुख्‍तार दलित स्त्रियां : राजेश कुमार चौहान
वर्गीय विभाजन को बनाये रखने वाले सांस्‍कृतिक हथियार के रूप में  ' इंग्लिश ' उर्फ ' अंग्रेजी' : अश्विनी कुमार
नारी लेखन: कहने की जरुरत : प्रो.. थानसिंग वर्मा
भारतीय सिनेमा और दलित : जादुई संसार की कटु यथार्थ : डॉ मुकेश कुमार मिरोठा
बलात्‍कार का समाजशास्‍त्र: डॉ. मोहन आर्य


शोध लेख
दलित प्रश्न और रेणु : डॉ. पूनम रानी
 
व्याख्यान
वे हमें जातिवाद कहते हैं: कंवल भारती
 
चिंतन
मानव जीवन के साथ जंगली जानवरों का संघर्ष : अशोक चौधरी

साक्षात्कार
कथाकार कुबेर से यशवंत मेश्राम की भेंटवार्ता
अभी तो सफर जारी है - इरफान :  अजय ब्रह्मात्मज 
दिल्‍ली को पूर्ण राज्‍य का दर्जा मिलें - मनीष सिसोदिया : डॉ. संजीत कुमार

कहानी
दोपहर का भोजन : अमरकांत
ऐसा मत कहो : भूपेन्द्र कुमार दवे
अमृत विद्धाश्रम: विजय कुमार
बेरोजगार : राजासिंह
फर्ज : आशीष आनंद आर्या
 
व्यंग्य
भगत जी की गत: हरिशंकर परसाई

लघुकथाएं
कैसे - कैसे चोर : सपना मांगलिक
शोक संवेदना या बधाई संदेश : प्रभुदयाल श्रीवास्तव

लोक कथा 
ठोली बोली : किसान दिवान

छत्‍तीसगढ़ी कहानी 
बेंगवा के टरर टरर :  विटठल राम साहू ' निश्‍छल ' 
झन फूटय घर : तेजनाथ  

व्यक्तित्व
भिखारी ठाकुर के मायने :मुन्ना कुमार पाण्डेय

सुरता
भाव और भाषा के साधक : गजानंद प्रसाद देवांगन दिशाबोध : वीरेन्द्र ' सरल '
 
कविता/ गीत/ गजल
प्रो. श्‍योराज सिंह ' बेचैन ' की दो कविताएं
कविता : कुहरा छाया है / राजेन्‍द्र गौतम
कविता / डॉ. संजीत कुमार की तीन कविताएं
कविता : वो बात / नरेश टांक ' अनय '
कविता : मुकेश वैद्य की कविताएं
कविता : अनुभव / शांतिदीप श्रीवास्‍तव
छत्‍तीसगढ़ी गीत : कब होबे सजोर / सुशील भोले
छत्तीसगढ़ी कुंडलियां : कइसे होथे संत / रमेश कुमार सिंह चौहान
छत्तीसगढ़ी छंद : अजब - गजब / लोकनाथ साहू ' ललकार '
गज़ल : मुकुंद कौशल के छत्तीसगढ़ी गज़ल
गज़ल :  वह दौर और / फूलचंद गुप्ता
गज़ल : समय किसी का / योगेन्द्र वर्मा ' व्योम '
गज़ल : जबां पर ताला /  जितेन्द्र ' सुकुमार '
गज़ल : तुम जो होते / लक्ष्मीप्रसाद बड़ोनी ' दर्द गढ़वाली '
दोहे : अन्दर के शैतान की / श्याम ' अंकुर '
नवगीत : कुंवार की हुई अवाई / प्रभुदयाल श्रीवास्तव
नवगीत : इच्‍छाधारी जीते हैं / अशोक ' अंजुम '
फिल्‍म समीक्षा 
हैदर जो कू . ए. यार से निकले तो सू. ए. दार चले : उमाशंकर सिंह

लेख 
हिन्‍दी फिल्‍में और कैबरे : डॉ. संजीत कुमार

 
पुस्तक समीक्षा
कूबत और औकात का अद्भुत सौन्दर्य 
(गीत संग्रह )
छत्तीसगढ़ के संस्कार हे, पुरखा के चिन्हारी  : समीक्षक धर्मेन्द्र निर्मल
 
साहित्यिक - सॉस्कृतिक गतिविधियॉं
मनोज शुक्ल ' मनोज ' की काव्य कृति का विमोचन

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें