इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

शनिवार, 29 नवंबर 2014

कब होबो सजोर

सुशील भाेले 
सुन संगी मोर, कब होबो सजोर
आंखी ले झांकत हे, आंसू के लोर ...

काला अच्छे दिन कहिथें, मन मोर गुनथे
तिड़ी - बिड़ी जिनगी ल, मोती कस चुनथे
किस्मत गरियार होगे, ते लेगे कोनो चोर ...

सरकार तो देथे, आनी - बानी के काम
बीच म कर देथे फेर, कोन हमला बेकाम
मुंह के कौंरा नंगाथे, देथे कनिहा ल टोर ...

रंग - रंग के गोठ होथे, रंग - रंग के बोल
आगे सुराज कहिके, पीटत रहिथें ढोल
फेर बरही दीया सुख के, कब होही अंजोर ...
पता : -
म.नं. 54 -191, डॉ. बघेल गली,
संजय नगर , टिकरापारा रायपुर [छ.ग.]
मोबा. नं. 08085305931, 9826992811

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