इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

शनिवार, 29 नवंबर 2014

अन्‍दर के शैतान की

श्‍याम ' अंकुर '
अन्दर की शैतान की बात करेगा कौन?
सबके मन में चोर है, लोग तभी सब मौन।।
अन्दर के शैतान की,पूछ रहे क्यों जात?
नहीं किसी को छोड़ता, करता सबसे घात।।
अन्दर के शैतान की, बुझी न अंकुर प्यास।
कलियों को है नोंचता, लाज करे खल्लास।।
अन्दर के शैतान की, बढ़ती जाती भूख।
नोंच रहा हैं बोटियां, बनकर यह उल्लूख।।
अन्दर के शैतान की,चर्चा चारों ओर।
छीन रहा हैं रंक के, मुँह की रोटी कौर।।
अन्दर के शैतान की, बात न पूछो यार।
बाहर से तो मोम सा, अन्दर से खूँखार।।
अन्दर के शैतान की, खूनी है आवाज।
प्यार जता के मारता, लूट रहा है लाज।।

- पता - 
 हठीला भैरुजी की टेक
बन्डोला वार्ड, बारां - 325205
मो. - 09461295238

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