इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

शनिवार, 22 नवंबर 2014

पहले दिल में

डां. कृष्‍णकुमार सिंह ' मयंक '
 
पहले दिल में आग लगाई
फिर नैनों में जल भर लाई
$खुद औरों से माँग रहे हैं,
अब इस युग के हातिमताई
तू तो सुख का आदी है,
तू क्या जाने पीर पराई
हार मेरी पहले से तय थी
सच्चाई ने मुँह की खाई
अब तो घर ही में दुश्मन है,
कैसा भाई, किसका भाई।
हाँ, पहले होती थी, लेकिन,
आज कहाँ है पन्ना दाई।
क्या मयंक सरहद पर जाकर,
किसी नेता ने जान गंवाई।

गज़ल - 5/597, विकास खण्ड
गोमती नगर, लखनऊ - 226010
मो. 09415418569

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