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शनिवार, 29 नवंबर 2014

तुम जो होते

लक्ष्‍मीप्रसाद बडोनी दर्द गढवाली 

तुम जो होते तो क्या नहीं होता।
जिंदगी से गिला नहीं होता।।

तुम अगर एक इशारा करते तो।
वक्त फिर बेवफा नहीं होता।।

ये गलतफहमियां न होती अगर।
मैं नजर से गिरा नहीं होता।।

तुम अगर वक्त पे जो मिल जाते।
दरबदर मैं हुआ नहीं होता।।


पुरशिसे - हाल को जो तुम आते।
दर्द का सिलसिला नहीं होता।।

देवपुरम कालोनी,
लोअर तुनवाला,देहरादून, उत्तराखंड
मो. 09455485094

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