इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

शनिवार, 22 नवंबर 2014

समय किसी का

योगेन्‍द्र वर्मा ' व्‍योम ' 

क्या तुझको एहसास नहीं है
समय किसी का दास नहीं है
सबसे बड़ा वही है निर्धन
बेटी जिसके पास नहीं है
तट को छला सदा लहरों ने
सागर पर विश्वास नहीं है
जादू था उन गुब्बारों में
मुनिया देख उदास नहीं है
फज़र् निभा ना सके शूल भी
कलियों में उल्लास नहीं है
व्योम कह रही यही विफलता
मन से किया प्रयास नहीं है 
- पता  -
एल एल - 49, सचिन स्वीट्स के पीछे
दीनदयाल नगर, फेज़ - प्रथम
काँठ रोड, मुरादाबाद [उ.प्र.]
मो. 0941280598

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