इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

शनिवार, 22 नवंबर 2014

मनोज शुक्‍ल ' मनोज ' काव्‍यकृति विमोचित

जबलपुर। वरिष्ठ कहानीकार एवं कवि श्री मनोज कुमार शुक्ल ''मनोज'' की काव्यकृति '' संवेदनाओं के स्वर '' का विमोचन गुंजन कला सदन जबलपुर में किया गया। स्व.डॉ. पूरनचंद श्रीवास्तव के जन्मोत्सव एवं 25 वां बुंदेली दिवस रजत जयंती समारोह के इस अवसर पर शहीद स्मारक जबलपुर के सभागार में कार्यक्रम के मुख्‍य अतिथि आचार्य कृष्णकान्त चतुर्वेदी थे अध्‍यक्षता पूर्व अध्यक्ष संस्कृत पाली प्राकृत विभाग रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय एवं पूर्व निदेशक कालीदास अकादमी उज्जैन म.प्र., ने की। विशिष्‍ट अतिथि के रूप में  आचार्य सनातन  बाजपेयी ''सनातन '' ,डॉ. गार्गीशरण मिश्र ''मराल '', आचार्य डा. हरिशंकर दुबे , डॉ राजकुमार ''सुमित्र'', डॉ. विजय तिवारी '' किसलय'' उपस्थित थे।
यह गरिमामयी कार्यक्रम  नगर के  सभी साहित्यकारों के करतल ध्वनि के  बीच प्रारंभ हुआ। कृतिकार मनोज ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस कृति में उन्होंने अपनी मानवीय भावनाओं और संवेदनाओं को  प्रस्तुत किया है। सामाजिक , राजनैतिक विसंगतियों को अपने ढंग से रखा है। अपने पिता श्री रामनाथ 'श्री नाथ '' की साहित्यिक विरासत को संजाऐं रखने में हम कहॉं तक सफल हुए हैं, यह हमारे पाठक ही  बता सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन श्री राजेश पाठक 'प्रवीण' ने एवं  आभार व्‍यक्‍त संस्था संस्थापक ओंकार श्रीवास्तव ने किया।

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