इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

सोमवार, 23 फ़रवरी 2015

समाचार है मुख्‍यपृष्‍ठ पर

योगेन्‍द्र वर्मा '' व्‍योम'' 

नुचे आज फिर तितली के पर
गश्त लगाता है सन्नाटा
कौन सुनेगा पीड़ा के स्वर
ढँूढा बहुत नहीं मिल पाये
कबिरा के वो ढाई आखर
रहने लगीं कोंपलें गुमसुम
माली बन बैठा सौदागर
धूप अनमनी बुझी - बुझी है
लड़ी आज सूरज से जी भर
नींद स्वप्न से तन्हाई में
रचा रही है आ स्वयंवर
व्योम क्षितिज के पार मिलेगा
जहाँ बना है पीड़ा का घर

पो.बा. - 139, ए एल - 49,
सचिन स्वीट्स के पीछे, दीनदयाल नगर
फेज़ - प्रथम काँठ रोड, मुरादाबाद (उ.प्र.)
मोबाईल: 0941280598

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