इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

सोमवार, 23 फ़रवरी 2015

समाचार है मुख्‍यपृष्‍ठ पर

योगेन्‍द्र वर्मा '' व्‍योम'' 

नुचे आज फिर तितली के पर
गश्त लगाता है सन्नाटा
कौन सुनेगा पीड़ा के स्वर
ढँूढा बहुत नहीं मिल पाये
कबिरा के वो ढाई आखर
रहने लगीं कोंपलें गुमसुम
माली बन बैठा सौदागर
धूप अनमनी बुझी - बुझी है
लड़ी आज सूरज से जी भर
नींद स्वप्न से तन्हाई में
रचा रही है आ स्वयंवर
व्योम क्षितिज के पार मिलेगा
जहाँ बना है पीड़ा का घर

पो.बा. - 139, ए एल - 49,
सचिन स्वीट्स के पीछे, दीनदयाल नगर
फेज़ - प्रथम काँठ रोड, मुरादाबाद (उ.प्र.)
मोबाईल: 0941280598

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