इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

गुरुवार, 26 फ़रवरी 2015

उनकी यादों का

                चाँद ' शेरी'
उनकी यादों का जो पलकों पै बसेरा होगा।
जगमगाते हुए दीपों में सबेरा होगा।।
प्यार की बीन पे नाच उठे जो नागिन की तरह
मीत उस गाँव की गोरी का सपेरा होगा।
ऐ - ग़ज़ल जिसने हसीं नक्श उभारे तेरे
माहिरे - फ़न वो अजन्ता का चितेरा होगा
काफिले को था यहीं जिस की निगाहेबानी पर
क्या ख़बर थी वो निगहेवां ही लुटेरा होगा
था वहाँ नामों - निशां भी न शजर का कोई
हमने सोचा था वहाँ साया घनेरा होगा
जिनके ज़ेहनों में न दर है न दरीचा कोई
उनके आगे तो अँधेरा ही अँधेरा होगा
कब किसी का ये जहाँ हो के रहा है ' शेरी'
फिर तुझे कैसे यक़ीं है कि ये तेरा होगा


पता -
के 30 आईपीआई ए
रोड नं. 1, कोटा - 5 (राजस्थान)
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