इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

शनिवार, 28 फ़रवरी 2015

हमर गंवई गॉंव म

गणेश यदु
चहके चिरइया, बिहिनिया अंगना अउ दुवार म। 
सरग - सुख पावंय जम्‍मों, अमरइया खेतखार म।। 
हमर गंवई गॉंव म...... 

छनर - छनर पइरी बाजय, पनिहारिन के पॉंव म। 
पंडरू - बछरू- पठरू बोलयं, महतारी के नांव म।।
खेलइया लइका निकरगे, खोर भिनसार म
हमर गंवई गॉंव म ...... 

बबा के खांसी - खोखली, लइका के तोतरी बोली। 
पिंजरा के सुवा बोले, संगी के हांसी ठिठोली।। 
सरी सुख ह अमाये हे, दाई के दुलार म 
हमर गंवई गॉंव म ......... 

अंगाकर चीला अउ चाहा, बनावत हे बहुरिया। 
गोसानिन संसो करय, भुखागे होही नंगरिहा।। 
रोटी - अथान धर के,  रेंगय, मेड़पार म 
हमर गंवई गॉंव म ......... 

बर अउ पीपर के छंइया, गॉंव म तीरथ - धाम हे।
पबरित नंदिया के पानी, गॉंव म बुता काम हे।। 
नइ जावन कहूं डहर दूसर के रूजगार म 
हमर गंवई गॉंव म ......... 

पता 
सम्‍बलपुर 
जिला - कांकेर (छ.ग.) 494633 
मोबा: 07898950591

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