इस अंक में :

मनोज मोक्षेन्‍द्र का आलेख '' सार्थक व्यंग्य के आवश्यक है व्यंग्यात्मक कटाक्षों की सर्वत्रता '', डॉ. माणिक विश्‍वकर्मा '' नवरंग '' का शोध लेख '' हिन्दी गज़ल का इतिहास एवं छंद विधान: हिन्दी की'',रविन्‍द्र नाथ टैगोर की कहानी '' सीमांत '', मनोहर श्‍याम जोशी की कहानी '' उसका बिस्‍तर '', कहानी ( अनुवाद उडि़या से हिन्दी)'' अनसुलझी''मूल लेखिका:सरोजनी साहू अनुवाद:दिनेश कुमार शास्त्री, छत्तीसगढ़ी कहिनी'' फोंक - फोंक ल काटे म नई बने बात'' लेखक:ललित साहू' जख्मी', बाल कहानी '' अनोखी तरकीब''''मेंढक और गिलहरी'' रचनाकार पराग ज्ञान देव चौधरी,सुशील यादव का व्यंग्य '' मन रे तू काहे न धीर धरे'', त्रिभुवन पांडेय का व्‍यंग्‍य ''ललित निबंध होली पर'',गीत- गजल- कविता: रचनाकार :खुर्शीद अनवर' खुर्शीद',श्याम'अंकुर',महेश कटारे'सुगम',जितेन्द्र'सुकुमार',विवेक चतुर्वेदी,सुशील यादव, संत कवि पवन दीवान,रोज़लीन,डॉ. जीवन यदु, टीकेश्वर सिन्हा'गब्दीवाला, बृजभूषण चतुर्वेदी 'बृजेश', पुस्तक समीक्षा:'' इतिहास बोध से वर्तमान विसंगतियों पर प्रहार'' समीक्षा : एम. एम. चन्द्रा'', ''मौन मंथन: एक समीक्षा''समीक्षा''मंगत रवीन्द्र,''जल की धारा बहती रहे''समीक्षा : डॉ. अखिलेश कुमार'शंखधर'

शनिवार, 28 फ़रवरी 2015

हमर गंवई गॉंव म

गणेश यदु
चहके चिरइया, बिहिनिया अंगना अउ दुवार म। 
सरग - सुख पावंय जम्‍मों, अमरइया खेतखार म।। 
हमर गंवई गॉंव म...... 

छनर - छनर पइरी बाजय, पनिहारिन के पॉंव म। 
पंडरू - बछरू- पठरू बोलयं, महतारी के नांव म।।
खेलइया लइका निकरगे, खोर भिनसार म
हमर गंवई गॉंव म ...... 

बबा के खांसी - खोखली, लइका के तोतरी बोली। 
पिंजरा के सुवा बोले, संगी के हांसी ठिठोली।। 
सरी सुख ह अमाये हे, दाई के दुलार म 
हमर गंवई गॉंव म ......... 

अंगाकर चीला अउ चाहा, बनावत हे बहुरिया। 
गोसानिन संसो करय, भुखागे होही नंगरिहा।। 
रोटी - अथान धर के,  रेंगय, मेड़पार म 
हमर गंवई गॉंव म ......... 

बर अउ पीपर के छंइया, गॉंव म तीरथ - धाम हे।
पबरित नंदिया के पानी, गॉंव म बुता काम हे।। 
नइ जावन कहूं डहर दूसर के रूजगार म 
हमर गंवई गॉंव म ......... 

पता 
सम्‍बलपुर 
जिला - कांकेर (छ.ग.) 494633 
मोबा: 07898950591

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