इस अंक में :

मनोज मोक्षेन्‍द्र का आलेख '' सार्थक व्यंग्य के आवश्यक है व्यंग्यात्मक कटाक्षों की सर्वत्रता '', डॉ. माणिक विश्‍वकर्मा '' नवरंग '' का शोध लेख '' हिन्दी गज़ल का इतिहास एवं छंद विधान: हिन्दी की'',रविन्‍द्र नाथ टैगोर की कहानी '' सीमांत '', मनोहर श्‍याम जोशी की कहानी '' उसका बिस्‍तर '', कहानी ( अनुवाद उडि़या से हिन्दी)'' अनसुलझी''मूल लेखिका:सरोजनी साहू अनुवाद:दिनेश कुमार शास्त्री, छत्तीसगढ़ी कहिनी'' फोंक - फोंक ल काटे म नई बने बात'' लेखक:ललित साहू' जख्मी', बाल कहानी '' अनोखी तरकीब''''मेंढक और गिलहरी'' रचनाकार पराग ज्ञान देव चौधरी,सुशील यादव का व्यंग्य '' मन रे तू काहे न धीर धरे'', त्रिभुवन पांडेय का व्‍यंग्‍य ''ललित निबंध होली पर'',गीत- गजल- कविता: रचनाकार :खुर्शीद अनवर' खुर्शीद',श्याम'अंकुर',महेश कटारे'सुगम',जितेन्द्र'सुकुमार',विवेक चतुर्वेदी,सुशील यादव, संत कवि पवन दीवान,रोज़लीन,डॉ. जीवन यदु, टीकेश्वर सिन्हा'गब्दीवाला, बृजभूषण चतुर्वेदी 'बृजेश', पुस्तक समीक्षा:'' इतिहास बोध से वर्तमान विसंगतियों पर प्रहार'' समीक्षा : एम. एम. चन्द्रा'', ''मौन मंथन: एक समीक्षा''समीक्षा''मंगत रवीन्द्र,''जल की धारा बहती रहे''समीक्षा : डॉ. अखिलेश कुमार'शंखधर'

सोमवार, 23 फ़रवरी 2015

गरमी के चारगोडिया

आनन्‍द तिवारी पौराणिक
(1)
अंगरा कस भुइंया धंधकत हे
सरर - सरर, लू चलत हे
सुरुज के बाढ़े तेवर
गली - मोहल्ला होगे सुन्ना, कलेचुप हे घर।
(2)
तन ले चूहय अब्बड़ पछीना
मन हे बियाकुल, गरमी के महीना
रहि रहि के, लागय पियास
रद्दा रेंगइया ल हे, छइंहा के आस
(3)
रेती के समन्दर, बनगे नदिया
सुक्खा होगे, कुआँ तरिया
गगरी धरे, भटकय पनिहारिन
सुन्ना परान अधर, पानी बिन
(4)
आलस के कविता, पियास के गीत
हरर - हरर, बड़ोंरा के संगीत
हवा म घुरगे हे, पछीना के गंध
अतलंग करय गरमी, पुरवाही हे बंद
(5)
गोधुली बेला संग संझा जभे आही
जुड़ हवा चलही, त जी ह जुड़ाही
दीया बाती होही, घर म जेवन चुरही, सबो खाहीं
थके परानी ल, निंदिया, लोरी गा के सुताही

श्रीराम टाकीज मार्ग
महासमुन्‍द( छ.ग.)

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