इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

गुरुवार, 26 फ़रवरी 2015

कैसा यह दौर

मुकुंद कौशल

चीखें चित्कारें हंगामे पुरज़ोर।
कृत्रिम आरोपों का ओर न छोर।।
बहरों की बस्ती में
सिसक रही भाषाएं।
लुटे हुए आँगन से
अब कैसी आशाएँ।

        बासंती मौसम की
        आँखों में पानी है
        दुख से तो मानव की
        मित्रता पुरानी है।
साँझ तो अभागन है विधवा है भोर।

प्रतिपीड़ित पीढ़ी पर
प्रश्नों के ढेर।
कौन राम खाएगा
शबरी के बेर।
        हमसे तो अपनी ही
        पूजा भी रुठी है।
        अपनों की परिभाषा
        सौ प्रतिशत झूठी है।
दंशित है अपना हर एक पौर - पौर।

पता -
एम - 516, पद्नाभपुर
दुर्ग - 491001 (छग)
मोबाईल : 9329416167 

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