इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

गुरुवार, 26 फ़रवरी 2015

अनूठा है मेरा मामला

केशव शरण

मंडी का
वह सांढ़
जानता है
ट्राली या बैलगाड़ी पर लदे
बोरों में क्या जा रहा है
उस हिसाब से
वह छोड़ देगा
या मुँह मारकर
बोरा फाड़ देगा

      मंदिर के बंदर जानते हैं 
      किसका थैला छीनना चाहिए

जेबकतरा जानता है
किसकी जेब में पैसा है

     ठग जानता है
     कौन ग़रज़मंद है
     और लोभी

डोरे डालने वाला जानता है
कौन पटेगी

    पतन जानता है
    कौन अहंकारी है

ईर्ष्या जानती है
कौन असमर्थ है

    सच जानता है
    कौन झूठा है

अनूठा है लेकिन मेरा मामला
मैं नहीं जानता
कौन है मेरा शत्रु
मेरे शुभचिन्तकों के बीच

पता -
एस 2/ 564, सिकरौल
वाराणसी - 221002
मोबा: 0941529137

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