इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

रविवार, 17 मई 2015

मई 2015 से जुलाई 2015

कहानी 
फूलो ( पुरस्‍कृत कहानी) - कुबेर
रोपवे (पुरस्‍कृत कहानी )- मनोज कुमार शुक्‍ल ' मनोज '
अरमान ( पुरस्‍कृत कहानी) - मुकुन्‍द कौशल
फॉंस (पुरस्‍कृत कहानी) - सनत कुमार जैन
तारनहार ( छत्‍तीसगढ़ी कहानी ) - धर्मेन्‍द्र '' निर्मल ''
घरेलू पति - राजा सिंह
लघुकथा
दो लघुकथाएं : अशोक गुजराती
पुस्‍तक समीक्षा
माई कोठी के धान: समीक्षक - हीरालाल अग्रवाल
माई कोठी के धान: लेखक की समीक्षा पर विनम्र प्रतिक्रिया
माई कोठी के धान की समीक्षा एवं लेखक की विनम्र प्रतिक्रिया पर विचार वीथी के नियमित समीक्षक यशवंत मेश्राम की टिप्‍पणी 

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