इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

रविवार, 17 मई 2015

मई 2015 से जुलाई 2015

कहानी 
फूलो ( पुरस्‍कृत कहानी) - कुबेर
रोपवे (पुरस्‍कृत कहानी )- मनोज कुमार शुक्‍ल ' मनोज '
अरमान ( पुरस्‍कृत कहानी) - मुकुन्‍द कौशल
फॉंस (पुरस्‍कृत कहानी) - सनत कुमार जैन
तारनहार ( छत्‍तीसगढ़ी कहानी ) - धर्मेन्‍द्र '' निर्मल ''
घरेलू पति - राजा सिंह
लघुकथा
दो लघुकथाएं : अशोक गुजराती
पुस्‍तक समीक्षा
माई कोठी के धान: समीक्षक - हीरालाल अग्रवाल
माई कोठी के धान: लेखक की समीक्षा पर विनम्र प्रतिक्रिया
माई कोठी के धान की समीक्षा एवं लेखक की विनम्र प्रतिक्रिया पर विचार वीथी के नियमित समीक्षक यशवंत मेश्राम की टिप्‍पणी 

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