इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

सोमवार, 31 अगस्त 2015

अगस्‍त 2015 से अक्‍टूबर 2015

संपादकीय
का सही म हम छत्‍तीसगढ़ी ल राजभासा बनाये खातिर ईमानदार हन
आलेख
छत्‍तीसगढ़ की सांस्‍कृतिक धरोहर : रंग सरोवर - वीरेन्‍द्र '' सरल ''
मुक्ति पर्व : 15 अगस्‍त - महेन्‍द्र भटनागर
छत्‍तीसगढ़ के सरुप : डॉ. चितरंजन कर
कहानी
हरम: अजय गोयल
बंटवारा : योगेन्‍द्र प्रताप मौर्य
कभी - कभी ऐसा होता है : अजय ठाकुर
बिना टिकट: मनोज सिंह
एक और सूरज : जितेन ठाकुर
दाग : सुशांत सुप्रिय

व्‍यंग्‍य
रचनात्‍मक भ्रष्‍टाचार : कुबेर
अंगद का पॉंव : श्रीलाल शुक्‍ल
सुधर जाओ परसाई : शशिकांत सिंह ' शशि '
रामसिंह की मौत : हनुमान मुक्‍त
लघुकथा
प्राण शर्मा की दो लघुकथाएं
बंद दरवाजा : मुंशी प्रेमचंद
गालियां : चन्‍द्रधर शर्मा ' गुलेरी '
ओछी मानसिकता : मीरा जैन
सुधार : हरिशंकर परसाई
ईश्‍वर का चेहरा : विष्‍णु प्रभाकर
मिल कर रहना, मिल कर मुस्‍कुराना : प्रभुदयाल श्रीवास्‍तव
गीत- ग़ज़ल- कविता
लाला जगदलपुरी की तीन रचनाएं
तीजा (छत्‍तीसगढ़ी गीत) :  नंदकुमार साहू
खादी के टोपी : कोदूराम ' दलित '
धर मशाल तैं ह संगी : सुशील ' भोले '
तीजा के लुगरा : थनवार निषाद ' सचिन '
भूख मरत ईमान गली म (मुक्‍तक) स्‍व. कुंजबिहारी चौबे
लोककथा
एक तोता और एक बूढ़ा बैगा : डॉ. विजय चौरसिया
अंधरी के बेटा ( छत्‍तीसगढ़ी ): विट्ठल राम साहू ' निश्‍छल' 
व्‍यक्तित्‍व
बहुआयामी कलाकार : सुरेश यादव : वीरेन्‍द्र बहादुर सिंह
पुस्‍तक समीक्षा
माइक्रो कविता और दसवां रस अर्थात भावनात्‍मक भ्रष्‍टाचार का पोष्‍टमार्टम : समीक्षक यशवंत
' यूं ही' अशोक अंजुम का ग़ज़ल संग्रह : समीक्षक डॉ. शिवओम अम्‍बर
फिल्‍म आलेख
कहां गुम हो गई छत्‍तीसगढ़ी जनजीवन की झलक : भूपेन्‍द्र मिश्र


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