इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

सोमवार, 24 अगस्त 2015

तीजा के लुगरा

      थनवार निषाद '' सचिन ''

सावन निकलिस अउ बुलकिस हे, राखी के तिहार,
तीजा लेबर आवत होही, मोर मइके के लेनहार।
                    भतीजा ला देखे बर, नयना हा तरसत हे,
                    भउजी संग गोठियाय बर, हिरदे हा हरसत हे।
गजब दिन मा मिलही, दाई के मया-दुलार...
गंगाजल अउ भोजली मन, नंगते के खिसियासी,
                  चिटठी - पाती काबर नई भेजे, कहिके वो ओरियाही।
                 घुना कीरा कस मँय हर होगेंव, आ के मँय ससुरार...
कइसे मनाहूँ मोर धनी ला, रिसहा वोकर बानी,
निंदई-कोड़ई के दिन-बादर हे, कर ही आनाकानी।
                 अंगठी गीनत दिन काँटत हँव, पल हा लगे पहार...
                 भउजी संग गोठियाय बर, हिरदे हा हरसत हे।

ग्राम - ढोढि़या ,पो. - सिंघोला
जिला - राजनांदगांव ( छ.ग.)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें