इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

सोमवार, 24 अगस्त 2015

तीजा के लुगरा

      थनवार निषाद '' सचिन ''

सावन निकलिस अउ बुलकिस हे, राखी के तिहार,
तीजा लेबर आवत होही, मोर मइके के लेनहार।
                    भतीजा ला देखे बर, नयना हा तरसत हे,
                    भउजी संग गोठियाय बर, हिरदे हा हरसत हे।
गजब दिन मा मिलही, दाई के मया-दुलार...
गंगाजल अउ भोजली मन, नंगते के खिसियासी,
                  चिटठी - पाती काबर नई भेजे, कहिके वो ओरियाही।
                 घुना कीरा कस मँय हर होगेंव, आ के मँय ससुरार...
कइसे मनाहूँ मोर धनी ला, रिसहा वोकर बानी,
निंदई-कोड़ई के दिन-बादर हे, कर ही आनाकानी।
                 अंगठी गीनत दिन काँटत हँव, पल हा लगे पहार...
                 भउजी संग गोठियाय बर, हिरदे हा हरसत हे।

ग्राम - ढोढि़या ,पो. - सिंघोला
जिला - राजनांदगांव ( छ.ग.)

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