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सोमवार, 24 अगस्त 2015

खादी के टोपी

कोदूराम दलित

पहिनो खादी टोपी भइया !
अब तो तुम्हरे राज हे
खादी के उज्जर टोपी ये
गाँधी जी के ताज हे ।
    आजादी के लड़िन लड़ाई
    पहिरिन ये ला वीर मन
    गोरा मन के टोप झुकाइन
    बलिदानी रणधीर मन ।

भइस देश आजाद बनिस
बंचक खातिर गाज ये
पहिनो खादी टोपी भइया !
अब तो तुम्हरे राज हे...
    सब्बो टोपी ले उज्जर
    सुग्घर सिर के सिंगार ये
    ये ला अपनाओ सब झिन देथे
    सुख शांति अपार ये ।

आधा गज कपड़ा खादी के
हमर बचाइस लाज ये
पहिनो खादी टोपी भइया !
अब तो तुम्हरे राज हे...
    बन जाथे कनटोप इही हर
    बन जाथे सुग्घर थैली
    नानुक साबुन मा धो डारो
    जब ये हो जावय मैली ।

येकर महिमा बता दिहिस
हम ला गाँधी महराज हे
पहिनो खादी टोपी भइया !
अब तो तुम्हरे राज हे...
    येकर उज्जर पन हमार मन के
    मन उज्जर कर देथय
    येकर निरमलता हमार मन मा
    निरमलता भर देथय ।

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