इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

सोमवार, 16 नवंबर 2015

नवम्‍बर 2015 से जनवरी 2015


आलेख
ढोला - मारू की कथा - महावीर सिंह गेहलोत
छत्‍तीसगढ़ की लोकगाथा: लोरिक चंदा - डॉ. सोमनाथ यादव
कहानी
जेल - मुंशी प्रेमचंद
कर्जा - रवि श्रीवास्‍तव 
सड़ांध - डॉ. संजीत कुमार
पीपल का पेड़ - डॉ. गीता गीत
दर्द - रवि मोहन शर्मा
विस्‍थापित - कामिनी कामायनी
जिजीविषा- ज्‍योतिर्मयी पंत
आग - श्‍वेता मिश्रा
अर्धांगिनी - सीमा सचदेव
छत्‍तीसगढ़ी कहानी
बनिहार - दीनदयाल साहू
व्‍यंग्‍य
अपना - अपना लोकतंत्र - शशिकांत सिंह '' शशि ''
गीत / गजल / कविता / मुक्‍तक
' अंकुर ' की दो गज़लें
होना चाहिए था ( गजल )- जगन्‍नाथ ' विश्‍व'
मालुम था ( गजल) - जगन्‍नाथ ' विश्‍व'
दो गज़लें : इब्राहीम कुरैशी
अशोक ' अंजुम ' की पांच गज़लें
उसकी अतलांत गहराईयों में ( कविता ) : रोजलीन
करवा चौथ ( कविता ) : मुकेश गुप्‍ता
शुल से पत्‍थर नुकीेले ( कविता) : प्रभुदयाल श्रीवास्‍तव
बारिस ( कविता ): हरदीप बिरदी
मुक्‍तक : पं. गिरिमोहन गुरू ' नगरश्री' 
डॉ.पीसीलाल यादव की  तीन छत्‍तीसगढ़ी गीत
पुस्‍तक समीक्षा
छत्‍तीसगढ़ी उपन्‍यास '' दिन बहुरिस '' म लोक संस्‍कृति

समीक्षा : देवचंद बंजारे
साहित्यिक - सांस्‍कृतिक गतिविधियां
इंटरनेट की दुनिया में तेजी से पांव पसार रही है हिन्‍दी: यादव
कुमारी स्‍मृति और राहुल वर्मा की पुस्‍तक का विमोचन

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