इस अंक में :

मनोज मोक्षेन्‍द्र का आलेख '' सार्थक व्यंग्य के आवश्यक है व्यंग्यात्मक कटाक्षों की सर्वत्रता '', डॉ. माणिक विश्‍वकर्मा '' नवरंग '' का शोध लेख '' हिन्दी गज़ल का इतिहास एवं छंद विधान: हिन्दी की'',रविन्‍द्र नाथ टैगोर की कहानी '' सीमांत '', मनोहर श्‍याम जोशी की कहानी '' उसका बिस्‍तर '', कहानी ( अनुवाद उडि़या से हिन्दी)'' अनसुलझी''मूल लेखिका:सरोजनी साहू अनुवाद:दिनेश कुमार शास्त्री, छत्तीसगढ़ी कहिनी'' फोंक - फोंक ल काटे म नई बने बात'' लेखक:ललित साहू' जख्मी', बाल कहानी '' अनोखी तरकीब''''मेंढक और गिलहरी'' रचनाकार पराग ज्ञान देव चौधरी,सुशील यादव का व्यंग्य '' मन रे तू काहे न धीर धरे'', त्रिभुवन पांडेय का व्‍यंग्‍य ''ललित निबंध होली पर'',गीत- गजल- कविता: रचनाकार :खुर्शीद अनवर' खुर्शीद',श्याम'अंकुर',महेश कटारे'सुगम',जितेन्द्र'सुकुमार',विवेक चतुर्वेदी,सुशील यादव, संत कवि पवन दीवान,रोज़लीन,डॉ. जीवन यदु, टीकेश्वर सिन्हा'गब्दीवाला, बृजभूषण चतुर्वेदी 'बृजेश', पुस्तक समीक्षा:'' इतिहास बोध से वर्तमान विसंगतियों पर प्रहार'' समीक्षा : एम. एम. चन्द्रा'', ''मौन मंथन: एक समीक्षा''समीक्षा''मंगत रवीन्द्र,''जल की धारा बहती रहे''समीक्षा : डॉ. अखिलेश कुमार'शंखधर'

मंगलवार, 10 नवंबर 2015

दो गजलें : इब्राहीम कुरैशी

1
कहाँ जा रहे हो, अकेले अकेले
हैं हम भी अकेेले, हमें भी साथ ले ले।
हैं एक ही मंजिल, तो साथ चलें हम
न मैं तुझसे आगे, न तू मुझसे पहले।
ये जगमग महफिल, ये दिलकश नज़ारे
छलते हैं लोगों को दुनियाँ के मेले।
जग में जब आया , तो मासूम था मैं
फिर मैं था तन्हा, और लाखों झमेले।
जीवन सभी को, कुछ ऐसे मिला है
भोगा किसी ने, किसी ने है झेले
मोहब्बत की कोई, हद तुम बता दो
कि जन्मे कहाँ, और कहाँ तक वो फैले।
जुल्म को जब भी, ललकारा मैंने
अक्सर कहा सबने, चुपचाप सहले।


हालात है खराब, खुदा खैर करे आज
उठने को है नकाब, खुदा खैर करे आज
जैसे भी कट गई, कल तक ये जिन्दगी
अब आएगा इंकिलाब, खुदा खैर करे आज
हर ओर उठ रहे हैं, सवालात बेशुमार
क्या देंगे वो जवाब, खुदा खैर करे आज
शोलों की दोस्ती का, कुछ ऐसा हुआ असर
शबनम बनी है आग, खुदा खैर करे आज
महफिल में सब मिले, अफसोस न मिल सके
कोई शर्म न हिज़ाब, खुदा खैर करे आज
दुनियां से मय के बादल, कुछ इस तरह उठे
अब बरसेगी बस शराब, खुदा खैर करे आज
लुटने का काम रहबर, अंजाम दे रहे हैं
और मुहाफिज बना कस्साब खुदा खैर करे आज
ऐ आवाम तूने उसको पैदा किया तो क्या
नेता तुझसे है नाराज़, खुदा खैर करे आज
उम्र भर सज्द़े किए, और इनाम की घड़ी में
मिलने को है अज़ाब, खुदा खैर करे आज
बड़े शौक से किए थेे, तेरी रहगुजर को रौशन
अब बुझ रहे चिराग,खुदा खैर करे आज

पता
स्टेशन रोड, महासमुन्द ( छ.ग.)
पिन : 493445 मो. 08982733227

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें