इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

सोमवार, 9 नवंबर 2015

उसकी अतलांत गहराईयों में

रोजलीन

जिससे
करती हूं प्रेम
टूट - टूट कर
लगता है
कि जैसे
उससे प्रेम नहीं करती
जिसके लिए
तड़प कर
रो पड़ती हूं
किसी भी क्षण
कई बार
लगता उससे प्रेम नहीं करती
जिसे नजर
देखने भर के लिए
कितनी ही नदियां
कितने ही प्रांत
कितने ही देश - द्वीप
कर सकती हूं पार
लगता है कि जैसे -
उसी के निकट बैठ
हो जाती हूं
रिक्त
एकांत
और
खो जाता है वही
फिर मुझसे
जिसके लिए उठाए इतने जतन
कि वो
बन जाता है मेरे लिए
एक अनदेखी - अनछुई
अदभुत, अपूर्व
कोई विराट दुनिया
जिसके भीतर
बिना यह सोचे
पूरी ताकत से कूद जाती हूं मैं
कि मुझे
तैरना भी आता है
कि नहीं ...
मैं खोजती हूं
उसकी अतलांत गइराईयों में
उसके ही अस्तित्व का
एक निर्मल कोना
जहां बैठकर लेनी है मुझे
चैन की एक लंबी नींद

पता
13 बी, एच.ए.पी. मधुबन
करनाल (हरियाणा)132037
मोबा. 09467011918 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें