इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

बुधवार, 10 फ़रवरी 2016

काम नहींं जो करता


श्याम अंकुर 
काम नहीं जो करता कुछ उसका है मधुमास नहीं
दुनियां को जो ठगता जी उस पर कुछ विश्वास नहीं।

मन में जिसके हिम्मत है, पर्वत बौने मानो जी,
मंजिल का वह मालिक है, बनता यारो दास नहीं।

रोना रोते रहते जी कर्म नहीं जो करते कुछ,
कर्म सदा जो करते हैं, उनको दुख कुछ खास नहीं।

मान लिया है दौलत से मुठ्ठी में सब लोग रहे,
ठोकर जग में खाते वे दौलत जिनके पास नहीं।

फूल खिले हैं बागों में मौसम बहुत सुहाना सा,
' अंकुर ' वह ही दुखिया है जिसके मन उल्लास नहीं

पता :
हठीला भैरूजी की टेक
मण्डोला वार्ड, बारां - 325205
मो.नं. : 09461295238

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