इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

बुधवार, 10 फ़रवरी 2016

सैंया भये कोतवाल

डॉ.पीसी लाल यादव

कोढ़िया, अलाल,दलाल, आज होगे मालामाल।
ऊँखरे बपौती होगे हे सबो, संगी सरकारी माल।।
कोनो बेचे ग गांजा - दारु,
कोनो लिखत हे सट्टा।
सरकारी जमीन के उन ला,
मिलगे हे फोकटे पट्टा।
गदहा डरुहात हे सब ला, ओढ़े बघवा के खाल।
कोढ़िया - अलाल - दलाल, आज होगे मालामाल।।
राजनीति अब सेवा कहाँ?
बनगे हे चोखा धंधा।
हर्रा लगे न फिटकिरी,
घर बइठे मिलय चंदा।
थाना - पुलुस घलो हे ऊंखरे, सैंया भये कोतवाल।
कोढ़िया - अलाल - दलाल, आज होगे मालामाल।।
मंत्री मन के आगू - पिछू,
घूमे ले बाढ़त हे भाव।
अधिकारी - करमचारी ऊपर,
जमत हे ठउका परभाव।
धमका - चमका के चम्मच, झारा होवत सबे लाल।
कोढ़िया - अलाल - दलाल, आज होगे मालामाल।।
गाँव - सहर म जेहू - तेहू,
धरलिन नेता के बाना।
करनी म कुछ खास नहीं,
सिरतोन होवत हे हाना।
गदहा खीर खावत मनमाने, घोड़वा के हाल - बेहाल।
कोढ़िया - अलाल - दलाल, आज होगे मालामाल।।

पता
साहित्य कुटीर
गंडई
जिला - राजनांदगांव (छत्‍तीसगढ़ )
मो.नं.: 09424113122

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