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इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

बुधवार, 10 फ़रवरी 2016

तइहा के जीनीस नंदा गे रे

गणेश यदु  
तइहा के बात ल बइहा लेगे, नवां जमाना आ गे रे।
मोला बड़ संसो होथे जी, तइहा के जिनीस नंदागे रे।।
        पहाती समे ढेंकी के बजना,
        मूसर म जी मेरखू ल कूटना।
        जांता के घरर - घरर - घर करना,
        टेड़ा - पाटी म पानी पलोना।।
पनिहारिन के मुचमुच हंसना कहां गंवागे रे।
मोला बड़ संसो होथे जी, तइहा के जिनीस नंदागे रे।।
        सड़क तीर खेत खार कहां गे,
        गाँव के खरिखाडांड़ कहां गे।
        चरांगन - चारा ल कोन ह खा गे,
        चरवाहा - राउत कहां परागे।
कसेली के दूध अउ दही कहां बोहागे रे।
मोला बड़ संसो होथे जी, तइहा के जिनीस नंदागे रे।।
        छकड़ा गाड़ी, घांटी नंदागे,
        कुआं के टेड़ा - पाटी नंदागे।
        ढेंकी जाता - घानी ह नंदागे,
        गिल्ली , भौंरा अउ बांटी नंदागे।।
नानपन के खेलकूद ल कोन ह चोरागे रे।
मोला बड़ संसो होथे जी, तइहा के जिनीस नंदागे रे।।
        मोटयारी के खोपा ह नइहे,
        खोपा म दावना, गोंदा नइहे।
        बेनी फुंदरा - फीता ह नइहे,
        मितान बदई के जोखा नइहे।
गोदना गोदइया अउ गवइया नंजरागे रे
मोला बड़ संसो होथे जी, तइहा के जिनीस नंदागे रे।।
       चुटकी, पइरी, पैजन अउ टोंड़ा,
        ऐंठी, पहूंची, ककनी - बनुरिया।
       सुंररा, सूंता, पुतरी - नवलखिया,
       फुली, खिनवा, ढार, बारी - पनिया।
ए गहना - गूठा के पहिरइया मन कहां गे रे।
मोला बड़ संसो होथे जी, तइहा के जिनीस नंदागे रे।।
        हरेली परब म पान खोंचइया,
        भितिया म पुतरी  - पुतरा बनइया।
        बांस खाप के गेंड़ी बनइया,
        रेंहची अउ गेंड़ी के चघइया।
डंडा पचरंगा तुये के खेलइया कहां गे रे।
मोला बड़ संसो होथे जी, तइहा के जिनीस नंदागे रे।।
        तीजा के लेनदार ह कहां गे,
        बेटी बर मया - दुलार कहां गे।
        सगा माने के रिवाज कहां गे,
        तीजा - पोरा म पियार कहां गे।
लइका मन के नंदिया बइला कहां भगा गे रे।
मोला बड़ संसो होथे जी, तइहा के जिनीस नंदागे रे।।
        गुरतुर पपची, बोबरा - अनअइरसा,
        ठेठरी, खुरमी, सोंहारी बरा।
        अंगाकर - चीला, फरा दूधफरा,
        खाये पाबे अब काखर करा।
अइसन कलेवा - मिठई ल बनइया कहां गे रे।
मोला बड़ संसो होथे जी, तइहा के जिनीस नंदागे रे।।
        परवार बर पीरा - मया नइहे,
       दाई - ददा संग रहइया नइहे।
       गोरसी तीर बइठइया नइहे,
       किस्सा - कहिनी के बतइया नइहे।
लोक संस्किरिति - संस्कार के देवइया कहां गे रे।
मोला बड़ संसो होथे जी, तइहा के जिनीस नंदागे रे।।
मोला बड़ संसों होथे जी, तइहा के जिनीस नंदागे रे।।
पता:
संबलपुर
जिला - कांकेर (छत्तीसगढ़) 494 635
मोबा. नं. 07898950591

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