इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

गुरुवार, 18 फ़रवरी 2016

फरवरी 2016 से अप्रैल 2016

संपादकीय
तब भी तिकड़ी थी, अब है, तो दोष कैसा मित्र?
आलेख

खिलवाड़ न करें धरती की चुम्‍बकीय शक्ति से : गोवर्धन यादव 
देवार गीत म संस्‍कृति के महक : देवचंद बंजारे

 
अनुवाद

मूल  ( अंग्रेजी ) द नाइटिंगल एण्‍ड द रोज: आस्‍कर वाईल्‍ड

( अनुवाद ): बुलबुल और गुलाब : व्दिजेन्‍द्र

कहानी

अखबार में नाम : यशपाल
रीती हुई :अनिल प्रभा कुमार
डे केयर : विद्या सिंह 


लघुकथा

बालकृष्‍ण गुप्‍ता ' गुरू ' की छह लघुकथाएं 
दो लघुकथाएं : कुबेर
गोवर्धन यादव की लघुकथाएं
और बारिस होने लगी : सुरेश सर्वेद 

शोध लेख

दलित साहित्‍य : उद्भ्‍ाव और विकास : यदुनंदन प्रसाद उपाध्‍याय
'' शिकंजे का दर्द '' में निहीत : दलित चेतना :अब्‍दुल हासिम
प्रेमकुमार मणि की रचना दृष्टि और विचारधारा : मनीष कनौजे

व्‍यंग्‍य

दुर्योधन काबर फेल होथे: दुरगा प्रसाद पारकर ( छत्‍तीसगढ़ी )
स्‍वार्थ के शिरोमणि : कांशीपुरी कुंदन
हे भगवान, यह कैसी प्रतियोगिता : प्रभुदयाल श्रीवास्‍तव


 गीत / ग़ज़ल / कविता

कृष्‍ण कुमार '' मयंक '' की चार ग़ज़लें
हर तरफ चली है ( गजल ) : कविता सिंह '' वफा ''
काम नहीं जो करता ( गजल ) : श्‍याम '' अंकुर ''
जितेन्‍द्र '' सुकुमार '' की तीन गजलें
सहारों के सहारे सारे ( गजल ) : सदानंद सुमन
ऐसी कोई चटटान नहीं ( नवगीत ) : विनय शरण सिंह
डॉ. कौशल किशोर श्रीवास्‍तव की दो कविताएं
सैंया भये कोतवाल : डॉ. पीसीलाल यादव ( छत्‍तीसगढ़ी गीत )
तइहा के जीनीस नंदा गे रे: गणेश यदु ( छत्‍तीसगढ़ी गीत )
तोर संग जोरेव पीरीत : विट्ठल राम '' निश्‍छल '' ( छत्‍तीसगढ़ी गीत )
राजनीति
बिहार हार के मायने : डॉ.संजीत कुमार
पुस्‍तक समीक्षा

स्‍वार्थ के वायरस : समीक्षक यशवंत

प्रविष्टियां
प्रविष्टियां आमंत्रित
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विकास का पर्याय बनी सड़कें ( विज्ञापन )
राजिम कुंभ 2016




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