इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

दुर्योधन काबर फेल होथे ?

मूल लेखक : प्रभाकर चौबे (हिन्दी)
 
अनुवाद : दुरगा प्रसाद पारकर ( छत्तीसगढ़ी )
 

     दुर्योधन एसो फेर फेल होगे। बीते बच्छर घलो फेल होय रिहिसे। का करबे महाभारत काल ले वोहा फेल होवत आवत हे। अवइया साल घलो परीक्षा मा बइठही। फेर फेल होही। वोहा फेल होएच बर परीक्षा देवथे...। दुर्योधन गुनथे आखिर वोहा फेल काबर होथे? महाभारत काल मा द्रोणाचार्य जइसे महान गुरु करा पढ़े के बाद घलो दुर्योधन फेल होगे रिहिसे। आज के गुरु मन तो अपन - आप ला द्रोणाचार्य मानथे तभो ले दुर्योधन फेल होवत हे। द्रोणाचार्य करा पढ़इया लइका मन डिस्टेक्शन मार्क काबर नी लावत हे? का खास - खास लइका मन ही पास होवथे? परीक्षा के नाव ले के दुर्योधन हा भारी टेंशन मा रथे। जइसन पूछथे, वोइसने उत्तर देथे तभो ले वोहा फेल हो जथे। सोला आना वाजिब उत्तर देथे तभो ले वोहा फेल हो जथे। जानो मानो फेल होएच बर जनम धरे हे बपरा हा ...।
     दुर्योधन ल आज तक समझ नई आइस कि वोहा उत्तर दे मा का गलती करथे। प्रश्र पूछथे वोहा उत्तर देथे। जइसन सवाल वइसन जवाब।
     परीक्षा मा प्रश्र रिहिस - तैंहा आघु डाहर का देखत हस? प्रश्र के उत्तर मा दुर्योधन ला जउन दिखत रिहिसे, वोहा सही - सही बता दीस - गुरुजी, मोला तो सरबस पेड़ हा दिखत हे। पेड़ के डारा - पाना, फर - फुल, सब्बो दिखत हे। उत्तर ला सुन के द्रोणाचार्य हा दुर्योधन ला फेल कर दिस। वोकर बाद गुरु द्रोणाचार्य हा इही सवाल अर्जुन ले पूछिस। अर्जुन हा उत्तर दिस - मोला तो चिरई के आँखी के सिवाय कुछु नी दिखत हे गुरुजी। ताहन अर्जुन हा प्रथम श्रेणी मा पास होगे। दुर्योधन गुनथे, गुरुजी हा जइसन उत्तर चाहथे वोइसने लिखबे तभे पास हो सकथस। कहूं दुर्योधन हा घलो उत्तर दे रहितिस कि मोला चिरई के आँखी के सिवाय कुछु नी दिखत हे कहिके त वहू हा प्रथम श्रेणी मा पास हो जय रहितिस। दुर्योधन ला का पता कि गुरु द्रोणाचार्य हा इही उत्तर चाहत रिहिसे। जइसन देखिस वोहा डिक्टो, वइसने के वइसनेबता दिस अउ फेल होगे।
     महाभारत काल ले सही विकल्प चुन के लिखे के सवाल पूछे जात हे। आजकल तो सही विकल्प चुन के लिखे के प्रश्र ही पूछे जात हे। एला ऑब्जेक्टिव प्रश्र केहे जाथे। ऑब्जेक्टिव प्रश्र मा अइसनों प्रश्र घलो पूछे जा सकथे कि ए सब मा तोर ददा के नाव कोन आय...। 1.रामलाल 2. श्यामलाल 3. मोहनलाल 4. रतनलाल। सही विकल्प चुन के उत्तर पुस्तिका के प्रथम पेज मा लिखव। अपन ददा के नाव के विकल्प चुने मा छात्र कन्फ्यूज हो जही। बाजू वाले छात्र ले पूछही कि संगवारी एमा मोर ददा कोन ए?
      दुर्योधन बहुत परेशान हे। घेरी - बेरी फेल होथे। परीक्षा मा कतको बच्छर ले एक सवाल पूछे जात हे कि भारत के गरीबी के कारन लिखव। दुर्योधन लिखिस - साहब, नेता अउ बेपारी लुटत हे घेरी - बेरी। ताहन वोला फेल कर दे गीस। दुर्योधन हा रिटोटलिंग बर आवेदन करिस, रीवेल्युएशन के माँग करिस। परीक्षक हा किहिस - बेटा दुर्योधन, तैंहा लिखे सच हस फेर जवाब हा सही नइहे। उत्तर उही सही हे जउन कुँजी मा लिखाय हे। कुँजी मा लिखाय उत्तर ला लिखबे त पास हो जबे। अपन मन के उत्तर झन लिख। जउन दिखत हे वोला झन लिख। परीक्षक हा जउन चाहथे वोला लिख। किताब मा लिखाय उत्तर ला ही गुरुजी मन पसंद करथे...।
      दुर्योधन हा सोचिस कि ए साल वोला निबंध मा जादा नम्बर मिलही। सवाल रिहिस - भारत के राष्ट्रीय खेल। वोहा लिखिस - हमर देस मा कतनो किसम के खेल खेले जाथे फेर हॉकी राष्ट्रीय खेल आवै। हम्मन हॉकी के दुर्दशा कर डरे हन तिही पाय के हॉकी राष्ट्रीय आय। जेला हम्मन राष्ट्रीय बनाथन वोला सिरिफ किताब के पन्ना मन म रंगे के लइक रख देथन। वोला गौरव गान खातिर रखे जाथे जइसे राष्ट्रीय चरित्र, राष्ट्रीय एकता, राष्ट्रीय शिक्षा वोइसने राष्ट्रीय खेल हॉकी। जेला सुधारे के कोसिस करे के गोठ करे जाय वोला राष्ट्रीय दर्जा दे जाथे। अतना लिखे के बाद दुर्योधन ला पचास में से पाँच अंक मिलिस। निबंध मा वोहा फेल होगे। ऐ बेवस्था ह सिरतोन के फीता काटे ले डर्राथे। फीस देवत जावव। वोला जउन चाहथे, वइसने लिखव। नी लिखबे ते एक चांस अऊ दे जाही, पूरक परीक्षा मा कोसिस करके देखव।
      अइसे प्रश्र होथे कि सही विकल्प चुनो। दुर्योधन हा लिखिस - आज विकल्प कहां हे? मास्टरी ले पटवारी के नउकरी बर कोसिस करइया बेरोजगार मन गली - गली घूमत हे। इहाँ तक ले एम.एम.एस.एस.सी., एम. काम. डिग्रीधारी मन घूमत हे। विकल्प कहाँ हे? जउन वोमा खुसर जव। पी. एच. डी. क्लर्की करत हे? बस एके विकल्प हे - पढ़ो, लिखो अउ बेरोजगार बनो। दुर्योधन हा अइसन उत्तर लिखिस अउ फेल हो गे।
      दुर्योधन हा सोच डरे हे परीक्षक हा जइसन उत्तर चाहथे वइसने लिखबे तभे पास हो सकथस। हिन्दी के प्रश्र पत्र  म एक ठन प्रश्न पूछे गीस कि भक्ति काल के श्रेष्ठ कवि आपके नजर मा कोन आय? सवाल के जवाब मा दुर्योधन लिखिस - कबीरा। वोला सौ मा सिरिफ तीसे अंक मिलिस। फेर कोनो दुसर छात्र हा लिख दीस - सूर - सूर तुलसी शशि अगन केशव दास, अब के कवि खद्योत (जोगनी) सम जहँ - तहँ करत प्रकाश।
      वोला सौ मा नब्बे अंक मिलगे। गुरु हा किहिस कि एहा सब्बो कवि मन ला पसंद करे हे। एहा सब झन ला खुश कर डरे हे। दुर्योधन ला मालूम होना चाही कि हर परीक्षा मा पास होए बर एके गुरु मंत्र हे कि परीक्षक ला खुश करव। बोर्ड परीक्षा होय, विश्वविद्यालय के परीक्षा होय चाहे जीवन के परीक्षा। साहब जइसन चाहथे वोकरे मुताबिक फाइल तइयार करबे तभे तरक्की होथे। नेता जइसन चाहथे, वोकरे मुताबिक भीड़ सकेलबे तभे चुनाव मा टिकट मिलथे। बस गुरुजी के मरजी के मुताबिक उत्तर लिख। कहूं वोकर मरजी के मुताबिक उत्तर नी देबे ते गुरु हा आदेस दे दिही- स्टेंडअप आन द बेंच। ताहन तेंहा जीनगी भर स्टेंडअप आन द बैंच रहिबे। कतनो झन खादी पहिन के राष्ट्रीय झंडा के गीत गावत जीवन पहावत हे अउ कुछ मन संसद मा पहुंच के राष्ट्रभक्ति बर उपदेश देवत हे। अइसन मन अपन अनुसार उत्तर नी देबे।  हाईकमानके पसंद के वोला उत्तर लिखथे।
      घोड़ा काकरो, लगाम कोनो अउ के हाथ मा, घोड़ा ला आगु बढ़े बर एड़ मरइया कोनो तीसर एकर बाद घलो घुड़सवार ले बढ़िया घुड़सवारी के उम्मीद करे जात हे। दुर्योधन फेल हो जथे। जउन दिखत हे वोला झन गोठिया। जउन गुनत हस वोला झन लिख। वोकर निहारे अउ गुने ला लिख, तभे ए गुड ब्याय, अदरवाइज फेल ....
पता
प्लाट = 3,सड़क - 11 आशीष नगर
(पश्चिम ) रिसाली,
भिलाई (छत्तीसगढ़ )   

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