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इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

शनिवार, 28 मई 2016

गरजत.घुमरत आबे रे बादर

सुशील भोले

गरजत.घुमरत आबे रे बादर, मया.पिरित बरसाबे
मोर धनहा ह आस जोहत हेए नंगत के हरसाबे... रे बादर....
जेठ - बइसाख के हरर - हरर म, धरती ह अगियागे
अंग - अंग ले अगनी निकलत हे, छाती घलो करियागे
आंखी फरकावत झुमरत आके, जिवरा ल जुड़वाबे ... रे बादर...
तरिया - नंदिया अउ डबरी ह, सोक - सोक ले सुखागे हे
कब के छोड़े बिरहिन सही, निच्चट तो अइलागे हे
बाजा घड़कावत आके तैं हए फेर गाभिन कर देबे ... रे बादर....
जीव- जंतु अउ चिरई.चिरगुनए ताला - बेली होगे हें
तोर अगोरा म बइठे - बइठे, अधमरहा कस होगे हेंं
जिनगी दे बर फिर से तैं हए अमरित बूंद पियाबे ... रे बादर...
नांगर - बक्खर के साज - संवांगा, कर डारे हावय किसान
खातू पलागे गाड़ा थिरागे, अक्ती म जमवा डारे हे धान
अब तो भइगे आके तैं ह, अरा - ररा करवाबे... रे बादर...

संजय नगर, रायपुर ( छ.ग.)
मोबा. नं.  98269.92811, 80853.05931

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