इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

शनिवार, 28 मई 2016

अनजाना दर्द

जितेन्द्र '' सुकुमार '' 

वक़्त ने दिये हमें ज़ख्म कैसे - कैसे
है चश्म मुद्दतों से नम कैसे - कैसे
अपनो को अपना समझता रहा
दिल ने पाला था भरम कैसे - कैसे
बयाँ करुं भी तो किस लबों से मैं
ज़माने ने किया सितम कैसे - कैसे
कभी तड़पाता, कभी सुकूँ भी देता
न पूछों हैं ये अज़ीज गम कैसे - कैसे
हाथ भी पकड़ा और छोड़ भी दिया
मिले राहों पे हमें हमदम कैसे - कैसे
दर्द औ भी बढ़ता गया '' सुकुमार ''
मिले बाज़ारों में मरहम कैसे - कैसे
 साहित्यकार
'' उदय अशियाना ''
चौबेबाँधा (राजिम)
जिला - गरियाबंद (छ.ग.) 493885
मोबा: 09009187981

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