इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

शनिवार, 28 मई 2016

अनजाना दर्द

जितेन्द्र '' सुकुमार '' 

वक़्त ने दिये हमें ज़ख्म कैसे - कैसे
है चश्म मुद्दतों से नम कैसे - कैसे
अपनो को अपना समझता रहा
दिल ने पाला था भरम कैसे - कैसे
बयाँ करुं भी तो किस लबों से मैं
ज़माने ने किया सितम कैसे - कैसे
कभी तड़पाता, कभी सुकूँ भी देता
न पूछों हैं ये अज़ीज गम कैसे - कैसे
हाथ भी पकड़ा और छोड़ भी दिया
मिले राहों पे हमें हमदम कैसे - कैसे
दर्द औ भी बढ़ता गया '' सुकुमार ''
मिले बाज़ारों में मरहम कैसे - कैसे
 साहित्यकार
'' उदय अशियाना ''
चौबेबाँधा (राजिम)
जिला - गरियाबंद (छ.ग.) 493885
मोबा: 09009187981

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें