इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

सोमवार, 29 अगस्त 2016

अगस्‍त 2016 से अक्‍टूबर 2016

सम्‍पादकीय
पानी और वृक्ष, सब पर भारी अब न चेते तो पछताना पड़ेगा ... 

आलेख
नामवर के बहाने : रवीन्‍द्र गोयल
भारत का अभागा गोर्की : साहित्‍यकार सपना मांगलिक

शोध लेख
नासिरा शर्मा के उपन्‍यासों का राष्‍ट्रीय एवं अर्तराष्‍ट्रीय परिदृश्‍य : शोधार्थी पूजा

कहानी
शेकी का घर : मनीष कुमार सिंह
दादा : राजा सिंह

गीत / गजल / कविता
राष्‍ट्रभाषा - गान : हरीलाल ' मिलन '  
वाक्‍या ऐसा हुआ : हरदीप बिरदी
तरूनाई को चुप .... : ठाकुरदास ' सिध्‍द ' 

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