इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

सोमवार, 29 अगस्त 2016

अगस्‍त 2016 से अक्‍टूबर 2016

सम्‍पादकीय
पानी और वृक्ष, सब पर भारी अब न चेते तो पछताना पड़ेगा ... 

आलेख
नामवर के बहाने : रवीन्‍द्र गोयल
भारत का अभागा गोर्की : साहित्‍यकार सपना मांगलिक

शोध लेख
नासिरा शर्मा के उपन्‍यासों का राष्‍ट्रीय एवं अर्तराष्‍ट्रीय परिदृश्‍य : शोधार्थी पूजा

कहानी
शेकी का घर : मनीष कुमार सिंह
दादा : राजा सिंह

गीत / गजल / कविता
राष्‍ट्रभाषा - गान : हरीलाल ' मिलन '  
वाक्‍या ऐसा हुआ : हरदीप बिरदी
तरूनाई को चुप .... : ठाकुरदास ' सिध्‍द ' 

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