इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

बुधवार, 24 अगस्त 2016

राष्‍ट्रभाषा - गान

हरीलाल ' मिलन '

रस - रस पूरित, छन्‍द अलंकृत,
उर - वाणी - वीणा में झंकृत,
मृदु - स्‍वर - स्‍नाता भारत माता
          जय भाषा, जय देश महान,
          जय हिन्‍दी, जय हिन्‍दुस्‍तान
नग - नागेश - प्रिय भू - सुषमामय,
पुष्‍प - अन्‍न, द्रुम - फल - उपमामय,
चिर - सुपाच्‍य - कृति, श्रेष्‍ठ - संस्‍कृति
          यश - समर्थ - लिपि - सुष्‍ठ - विधान,
          जय हिन्‍दी , जय हिन्‍दुस्‍तान।
सन्धि - शान्ति - नित,पद गंगामृत,
जन - अखण्‍ड, आदर्श - अपरिमित,
राष्‍ट्र - विधात्री, युग - निर्मात्री,
          विषय - कल्‍पना - तर्क निधान,
          जय हिन्‍दी, जय हिन्‍दुस्‍तान।
शब्‍द - कलानिधि, अर्थ - पयोनिधि,
चित्‍त, बुध्दि, मन की प्रकाशविधि,
प्राइज़ - पूजिता, सिन्‍धु - नि:सृता,
          ज्ञान - मन्‍जरी - मधु की खान,
          जय हिन्‍दी, जय हिन्‍दुस्‍तान।
भाव - भाषिणी, हिन्‍द - वासिनी,
दृश्‍य - श्रव्‍य - सुख - हेम स्‍वामिनी,
छान्‍दस् - तनुजा , कवि-कलिन्‍दजा,
           सत्‍यं शिवं सुन्‍दरम् गान,
           जय हिन्‍दी, जय हिन्‍दुस्‍तान
पता
300 ए / 2 ( प्‍लाट - 16 )
दुर्गावती सदन, हनुमन्‍त विहार
नौबस्‍ता, कानपुर - 208 021
मो: 09935299939

2 टिप्‍पणियां:

  1. कृपया नागेश के स्थान पर नगेश.सुपाच्य के स्थान पर सुप्राच्य व प्र। इस व प्राइस के स्थान प्राग्य पदें

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  2. कृपया नागेश के स्थान पर नगेश.सुपाच्य के स्थान पर सुप्राच्य व प्र। इस व प्राइस के स्थान प्राग्य पदें

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