इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

बुधवार, 24 अगस्त 2016

तरूनाई को चुप..

ठाकुरदास ' सिध्‍द '

तरुणाई को चुप कराना चाहता है।
इसलिए माफिक बहाना चाहता है।।
साथ अपने कर लिए उसने लफंगे।
और अब ताकत दिखाना चाहता है।।
गालियों वाली बना ली फौज है जो।
गोलियों वाली बनाना चाहता है।।
हम अमन के गीत गाते हैं मगर वो।
नफरतों वाला तराना चाहता है।।
पाक दामन जो रहे नायक हमारे।
दाग दामन में लगाना चाहता है।।
वह रहे वाचाल बाकी बेज़ुबाँ हों।
जाने वह कैसा ज़माना चाहता है।।
अब अँधेरा हो चला बेहद घना है।
' सिद्ध ' इक दीपक जलाना चाहता है।।

पता
सिद्धालय 672 - 41 सुभाष नगर
दुर्ग - 491001 छत्तीसगढ़
मो. - 9406375695

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