इस अंक में :

मनोज मोक्षेन्‍द्र का आलेख '' सार्थक व्यंग्य के आवश्यक है व्यंग्यात्मक कटाक्षों की सर्वत्रता '', डॉ. माणिक विश्‍वकर्मा '' नवरंग '' का शोध लेख '' हिन्दी गज़ल का इतिहास एवं छंद विधान: हिन्दी की'',रविन्‍द्र नाथ टैगोर की कहानी '' सीमांत '', मनोहर श्‍याम जोशी की कहानी '' उसका बिस्‍तर '', कहानी ( अनुवाद उडि़या से हिन्दी)'' अनसुलझी''मूल लेखिका:सरोजनी साहू अनुवाद:दिनेश कुमार शास्त्री, छत्तीसगढ़ी कहिनी'' फोंक - फोंक ल काटे म नई बने बात'' लेखक:ललित साहू' जख्मी', बाल कहानी '' अनोखी तरकीब''''मेंढक और गिलहरी'' रचनाकार पराग ज्ञान देव चौधरी,सुशील यादव का व्यंग्य '' मन रे तू काहे न धीर धरे'', त्रिभुवन पांडेय का व्‍यंग्‍य ''ललित निबंध होली पर'',गीत- गजल- कविता: रचनाकार :खुर्शीद अनवर' खुर्शीद',श्याम'अंकुर',महेश कटारे'सुगम',जितेन्द्र'सुकुमार',विवेक चतुर्वेदी,सुशील यादव, संत कवि पवन दीवान,रोज़लीन,डॉ. जीवन यदु, टीकेश्वर सिन्हा'गब्दीवाला, बृजभूषण चतुर्वेदी 'बृजेश', पुस्तक समीक्षा:'' इतिहास बोध से वर्तमान विसंगतियों पर प्रहार'' समीक्षा : एम. एम. चन्द्रा'', ''मौन मंथन: एक समीक्षा''समीक्षा''मंगत रवीन्द्र,''जल की धारा बहती रहे''समीक्षा : डॉ. अखिलेश कुमार'शंखधर'

गुरुवार, 10 नवंबर 2016

नवम्‍बर 2016 से जनवरी 2017

सम्पादकीय
छत्‍तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा मिले, इस पर जाेर दें


आलेख
छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के बेजोड़ शिल्पी : खुमान साव - वीरेन्द्र बहादुर सिंह
' अंधेरे में ' पर पुर्नविचार - रामाज्ञा शशिधर
बाल साहित्य का उद्भव और विकास - यदुनंदन प्रसाद उपाध्याय
कहानी
उसकी माँ - पांडेय बचैन शर्मा ' उग्र '
चेहरा - मोना सिंह
जेबकतरा - भूपेन्द्र कुमार दवे
ग्यारह वर्ष का समय - आचार्य रामचंद्र शुक्ल
ओते की कहानी - रविकांत मिश्रा
छत्तीसगढ़ी कहानी
आंजत - आंजत कानी होगे - सुशील भोले 
दहकत गोरसी - जयंत साहू
मिटठू मदरसा - किसान दीवान  (छत्तीसगढ़ी अनुवाद)

कविता/ गीत/ गजल
दो रचनाएं - सपना मांगलिक
नदिया के धार बहिस (छत्तीसगढ़ी गीत), - गीता सिंह 
खींच जायेगी खाल (दोहे)- ठाकुर प्रसाद सिद्ध
करिया बादर (छत्तीसगढ़ी गीत) श्रीमती जयभारती चंद्राकर
कश्मीर हमारा है (नवगीत) हरीलाल मिलन

बालकथा
जंगली - रामनरेश उज्जवल


पुस्तक समीक्षा
गलत समय पर प्रकाशित सही कविताएं / - समीक्षा - विवेक मिश्र
जीवन के हर रंग की कविताएं - समीक्षा - चिराग जैन
यादें
वो मेरा गाँव - घनश्याम भारतीय 
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किसान हित में सबसे आगे
मेरा देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है 

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