इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

गुरुवार, 10 नवंबर 2016

नवम्‍बर 2016 से जनवरी 2017

सम्पादकीय
छत्‍तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा मिले, इस पर जाेर दें


आलेख
छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के बेजोड़ शिल्पी : खुमान साव - वीरेन्द्र बहादुर सिंह
' अंधेरे में ' पर पुर्नविचार - रामाज्ञा शशिधर
बाल साहित्य का उद्भव और विकास - यदुनंदन प्रसाद उपाध्याय
कहानी
उसकी माँ - पांडेय बचैन शर्मा ' उग्र '
चेहरा - मोना सिंह
जेबकतरा - भूपेन्द्र कुमार दवे
ग्यारह वर्ष का समय - आचार्य रामचंद्र शुक्ल
ओते की कहानी - रविकांत मिश्रा
छत्तीसगढ़ी कहानी
आंजत - आंजत कानी होगे - सुशील भोले 
दहकत गोरसी - जयंत साहू
मिटठू मदरसा - किसान दीवान  (छत्तीसगढ़ी अनुवाद)

कविता/ गीत/ गजल
दो रचनाएं - सपना मांगलिक
नदिया के धार बहिस (छत्तीसगढ़ी गीत), - गीता सिंह 
खींच जायेगी खाल (दोहे)- ठाकुर प्रसाद सिद्ध
करिया बादर (छत्तीसगढ़ी गीत) श्रीमती जयभारती चंद्राकर
कश्मीर हमारा है (नवगीत) हरीलाल मिलन

बालकथा
जंगली - रामनरेश उज्जवल


पुस्तक समीक्षा
गलत समय पर प्रकाशित सही कविताएं / - समीक्षा - विवेक मिश्र
जीवन के हर रंग की कविताएं - समीक्षा - चिराग जैन
यादें
वो मेरा गाँव - घनश्याम भारतीय 
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किसान हित में सबसे आगे
मेरा देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है 

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