इस अंक में :

मनोज मोक्षेन्‍द्र का आलेख '' सार्थक व्यंग्य के आवश्यक है व्यंग्यात्मक कटाक्षों की सर्वत्रता '', डॉ. माणिक विश्‍वकर्मा '' नवरंग '' का शोध लेख '' हिन्दी गज़ल का इतिहास एवं छंद विधान: हिन्दी की'',रविन्‍द्र नाथ टैगोर की कहानी '' सीमांत '', मनोहर श्‍याम जोशी की कहानी '' उसका बिस्‍तर '', कहानी ( अनुवाद उडि़या से हिन्दी)'' अनसुलझी''मूल लेखिका:सरोजनी साहू अनुवाद:दिनेश कुमार शास्त्री, छत्तीसगढ़ी कहिनी'' फोंक - फोंक ल काटे म नई बने बात'' लेखक:ललित साहू' जख्मी', बाल कहानी '' अनोखी तरकीब''''मेंढक और गिलहरी'' रचनाकार पराग ज्ञान देव चौधरी,सुशील यादव का व्यंग्य '' मन रे तू काहे न धीर धरे'', त्रिभुवन पांडेय का व्‍यंग्‍य ''ललित निबंध होली पर'',गीत- गजल- कविता: रचनाकार :खुर्शीद अनवर' खुर्शीद',श्याम'अंकुर',महेश कटारे'सुगम',जितेन्द्र'सुकुमार',विवेक चतुर्वेदी,सुशील यादव, संत कवि पवन दीवान,रोज़लीन,डॉ. जीवन यदु, टीकेश्वर सिन्हा'गब्दीवाला, बृजभूषण चतुर्वेदी 'बृजेश', पुस्तक समीक्षा:'' इतिहास बोध से वर्तमान विसंगतियों पर प्रहार'' समीक्षा : एम. एम. चन्द्रा'', ''मौन मंथन: एक समीक्षा''समीक्षा''मंगत रवीन्द्र,''जल की धारा बहती रहे''समीक्षा : डॉ. अखिलेश कुमार'शंखधर'

मंगलवार, 8 नवंबर 2016

करिया बादर

श्रीमती जय भारती चन्द्राकर
करिया बादर ल आवत देख के,
जरत भुइंया हर सिलियागे।

गहिर करिया बादर ल लान के अकास मा छागे
मंझनिया कुन कूप अंधियार म सुरूज हर लुकागे
मघना अस गरजत बादर हर सबो डहार छरियागे
बिरहनी आँखी मा पिय के चिंता फिकर समागे।
करिया बादर ...

गर्रा संग बादर बरस के, जरत भुइंया के परान जुड़ागे
सोंधी माटी के सुवास हर खेत - खार म महमागे
झरर - झरर पानी गिरिस रूख राई हरियागे
हरियर - हरियर खेत - खार मा नवा बिहान आगे।
करिया बादर ...

दूरिया ले आवत बादर हर सबो ला सुख देथे
चिरैया डुबकी लगा के बरसत पानी मा पंख ला झराथे।
पानी हर अउ रदरद ले गिरथे
लइका मन ल बरसत पानी म भीजे के मजा आथे।
करिया बादर...

जेठ मा नव तपा हर आंगी अस देह ला जराथे
असाढ़ के करिया बादर देह ला चंदन अस ठंडाथे
बादर नई दिखे त मेचका - मेचकी के बिहाव ल करथे
सावन - भादो मा तरिया - नरवा लबालब हो जाथे।
करिया बादर ...

व्याख्याता
गरियाबंद

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