इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

मंगलवार, 8 नवंबर 2016

नदिया के धार बहिस

गीता नेह
नदिया के धार बहिस
नदिया के धार बहिस
छुनुन - छुनुन छन कहिस

चउमासी कचरा मन धारोधार बोहागे
मटियाहा पानी मन सुग्घर अब छनागे
पी लौ सोसन भर सब
गुरतुर कछार कहिस... नदिया के धार बहिस

अब नइ बोहाव ग डुबकव हरहिन्छा
फरी - फरी पानी हे तउंरव छुरछिंदा
देखव दरपन कस अउ
मुॅंह ल निहार कहिस ... नदिया के धार बहिस

उजरा लौ तन ल अउ फरिहा लौ मन ल
सुस्ता लौ सुरता म खोजव लरकन ल
जॉंगर ह थक गे हे
गोड़ ल दव डार कहिस ... नदिया के धार बहिस

पयरी ला मांजथे चूंदी ल टांगथे
ओन्हा निचोवथे हॅंउला ल मॉंजथे
लुगरा बोहावत हे
पखरा ल उघार कहिस ... नदिया के धार बहिस

बालको नगर, कोरबा (छत्तीसगढ़ )

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