इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

मंगलवार, 8 नवंबर 2016

नदिया के धार बहिस

गीता नेह
नदिया के धार बहिस
नदिया के धार बहिस
छुनुन - छुनुन छन कहिस

चउमासी कचरा मन धारोधार बोहागे
मटियाहा पानी मन सुग्घर अब छनागे
पी लौ सोसन भर सब
गुरतुर कछार कहिस... नदिया के धार बहिस

अब नइ बोहाव ग डुबकव हरहिन्छा
फरी - फरी पानी हे तउंरव छुरछिंदा
देखव दरपन कस अउ
मुॅंह ल निहार कहिस ... नदिया के धार बहिस

उजरा लौ तन ल अउ फरिहा लौ मन ल
सुस्ता लौ सुरता म खोजव लरकन ल
जॉंगर ह थक गे हे
गोड़ ल दव डार कहिस ... नदिया के धार बहिस

पयरी ला मांजथे चूंदी ल टांगथे
ओन्हा निचोवथे हॅंउला ल मॉंजथे
लुगरा बोहावत हे
पखरा ल उघार कहिस ... नदिया के धार बहिस

बालको नगर, कोरबा (छत्तीसगढ़ )

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें