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इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

मंगलवार, 8 नवंबर 2016

कश्‍मीर हमारा है

हरीलाल मिलन

भारत का सितारा है सितारा ही रहेगा।
कश्मीर  हमारा  है  हमारा ही रहेगा।

सरहद के  आस-पास भी आने न देंगे हम,
अब एक इंच भी ज़मीं जाने न देंगे हम,

प्यारा हमारे देश का प्यारा ही रहेगा,
कश्मीर  हमारा  है  हमारा ही रहेगा।

आतंकवादियों।़ ज़रा अल्लाह से डरो,
इन्सान हो इन्सानियत के नाम पर मरो,

जो है तुम्हारे पास तुम्हारा ही रहेगा,
कश्मीर  हमारा  है  हमारा  ही रहेगा।

उस रोज ठहर जायेगी ये आग ये हिंसा,
जिस रोज अस्त्र- शस्त्र उठायेगी अहिंसा,

न्यारा हमारा देश है न्यारा ही रहेगा,
कश्मीर हमारा है हमारा ही रहेगा।
कुछ भी न कर सकेंगी तुम्हारी मिसाइलें,
तुमको जवाब देंगी  हमारी  मिसाइलें,

हारा है शत्रु युद्ध में हारा ही रहेगा,
कश्मीर  हमारा है  हमारा ही रहेगा।

300 ए / 2 (प्लाट - 16 बी) , दुर्गावती सदन,
हनुमन्त नगर, नौबस्ता, कानपुर - 208039
मोबा. 09935299939

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