इस अंक में :

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बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

तुम्‍हारे घर के किवाड़

रोज़लीन 
तुम्हारे घर के किवाड़
जानती हूं
तुम्हारे घर की ओर
मुड़ते हुए
मुझे नहीं सोचना चाहिए
कि मुझे
तुम्हारे घर की ओर मुड़ना है,
तुम्हारी दहलीज पर आ कर
नहीं रुकना चाहिए ठिठक कर
कि मेरे कदमों की आहट
तुम्हारा कोई स्वप्र
भंग न कर दे
खटखटाकर तुम्हारा किवाड़
नहीं लेनी चाहिए इजाज़त
तुम्हारे भीतर आने की
जबकि
मैं जानती हूं -
सदियों से खुले हैं
तुम्हारे किवाड़
मेरे लिए
देखो न ...
फिर भी
कैसे भय से कांपता है दिल
तुम तक पहुंचने के
ख्याल भर से 

535, गली नं. - 7,कर्ण विहार, मेन रोड,
करनाल - 132001 (हरियाणा)
मो. 09467011918

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