इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

घन छाये क्‍या रात हुई

श्‍याम '' अंकुर '' 

घन छाये क्या रात हुई मेंढक के टर्राने से
हरदम क्या बरसात हुई मेंढक के टर्राने से
किसके दिल पे घाव हुआ किसकी आँखें रोई है
मीत नई क्या बात हुई मेढक के टर्राने से
सन्नाटों में हलचल से डर का दानव हॅसता है
बात नई क्या तात हुई मेढक के टर्राने से
आँखें गीली खेत भी सूखे - सूखे किसना के
दूर कहाँ यह घात हुई मेंढक के टर्राने से
पहले जैसी रातें हैं अंकुर तोता- मैना की
रात कहाँ सौगात हुई मेंढक के टर्राने से

हठौला भैरुजी की टेक, 
मण्डोला, बारां - 325205

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