इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

वो जुगनुओं को

जितेन्‍द्र '' सुकुमार '' 

वो जुगनुओं को आफताब कर देता है
छू कर कांटों को गुलाब कर देता है
उसको ना समझों कोई मामुली यारों
मिला अश्क पानी को शराब कर देता है
रुहानियत है बसी उसकी हर अदा में
वो ह$कीकत को ख़्वाब कर देता है
उठाकर हिजाब से पर्दा '' सुकुमार ''
नाकाब को भी बेनाकाब कर देता है

साहित्यकार
उदय अशियाना, चौबेबांधा, (राजिम),
जिला - गरियाबंद
(छ.ग.) 493 885, मो. : 09009187981

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