इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

वो जुगनुओं को

जितेन्‍द्र '' सुकुमार '' 

वो जुगनुओं को आफताब कर देता है
छू कर कांटों को गुलाब कर देता है
उसको ना समझों कोई मामुली यारों
मिला अश्क पानी को शराब कर देता है
रुहानियत है बसी उसकी हर अदा में
वो ह$कीकत को ख़्वाब कर देता है
उठाकर हिजाब से पर्दा '' सुकुमार ''
नाकाब को भी बेनाकाब कर देता है

साहित्यकार
उदय अशियाना, चौबेबांधा, (राजिम),
जिला - गरियाबंद
(छ.ग.) 493 885, मो. : 09009187981

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