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इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

शुक्रवार, 26 मई 2017

जीवन का मूल्‍य

        यह कहानी पुराने समय की है। एक दिन एक आदमी गुरु के पास गया और उनसे कहा - बताइए गुरुजी, जीवन का मूल्य क्या है?
        गुरु ने उसे एक पत्थर दिया और कहा - जा और इस पत्थर का मूल्य पता करके आ, लेकिन ध्यान रखना पत्थर को बेचना नहीं है।''
        वह आदमी पत्थर को बाजार में एक संतरे वाले के पास लेकर गया और संतरे वाले को दिखाया और बोला - बता इसकी कीमत क्या है ?''
        संतरे वाला चमकीले पत्थर को देखकर बोला - 12 संतरे ले जा और इसे मुझे दे जा।''
       वह आदमी संतरे वाले से बोला - गुरु ने कहा है, इसे बेचना नहीं है।'' और आगे वह एक सब्जी वाले के पास गया और उसे पत्थर दिखाया। सब्जी वाले ने उस चमकीले पत्थर को देखा और कहा - एक बोरी आलू ले जा और इस पत्थर को मेरे पास छोड़ जा।''
उस आदमी ने कहा - मुझे इसे बेचना नहीं है, मेरे गुरु ने मना किया है।''
आगे एक सोना बेचने वाले सुनार के पास वह गया और उसे पत्थर दिखाया।सुनार उस चमकीले पत्थर को देखकर बोला - 50 लाख में बेच दे।''
उसने मना कर दिया तो सुनार बोला - 2 करोड़ में दे दे या बता इसकी कीमत जो मांगेगा, वह दूंगा तुझे।''
उस आदमी ने सुनार से कहा - मेरे गुरु ने इसे बेचने से मना किया है।''
आगे हीरे बेचने वाले एक जौहरी के पास वह गया और उसे पत्थर दिखाया।जौहरी ने जब उस बेशकीमती रुबी को देखा तो पहले उसने रुबी के पास एक लाल कपड़ा बिछाया, फिर उस बेशकीमती रुबी की परिक्रमा लगाई, माथा टेका, फिर जौहरी बोला - कहां से लाया है ये बेशकीमती रुबी? सारी कायनात, सारी दुनिया को बेचकर भी इसकी कीमत नहीं लगाई जा सकती। ये तो बेशकीमती है।''
        वह आदमी हैरान - परेशान होकर सीधे गुरु के पास गया और अपनी आपबीती बताई और बोला - अब बताओ गुरुजी,मानवीय जीवन का मूल्य क्या है ?''
        गुरु बोले - तूने पहले पत्थर को संतरे वाले को दिखाया, उसने इसकी कीमत 12 संतरे बताई। आगे सब्जी वाले के पास गया, उसने इसकी कीमत 1 बोरी आलू बताई। आगे सुनार ने 2 करोड़ बताई और जौहरी ने इसे बेशकीमती बताया। अब ऐसे ही तेरा मानवीय मूल्य है। इसे तू 12 संतरे में बेच दे या 1 बोरी आलू में या 2 करोड़ में या फिर इसे बेशकीमती बना ले। ये तेरी सोच पर निर्भर है कि तू जीवन को किस नजर से देखता है।''

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