इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

मंगलवार, 23 मई 2017

गज़ल

अशोक '' अंजुम ''

लम्हा - लम्हा हिसाब रखते हैं
यार भी अब नकाब रखते हैं

उनके हाथों में फिर वही पत्थर
हम हमेशा गुलाब रखते हैं

ये अलहदा है लब नहीं खुलते
यूँ तो हम भी जवाब रखते हैं

सर्द पथराई - सी नज़र लेकर
चन्द उजियारे ख़्वाब रखते हैं

गीत - गज़लों की शक्ल लेता है
दर्द हम लाजवाब रखते हैं

जि़न्दगी उतनी मुँह चिढ़ाए है
लोग जितनी किताब रखते हैं 

पता
बगली 2, चंद्रविहार कालोनी (नगला डालचन्द)
क्वारसी बाईपास, अलीगढ़ - 202002 उ.प्र.

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