इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

मंगलवार, 30 मई 2017

मई 2017 से जुलाई 2017

सम्पादकीय

आलेख

नारद की कल्‍याणकारी पत्रकारिता : लोकेन्‍द्र सिंह
यही तो मजदूर है : ललित साहू '' जख्‍मी ''


कहानी
घास काटने की मशीन : उपेन्‍द्रनाथ '' अश्‍क ''
रिसते घाव : बूटासिंह
अनंत यात्रा : नरेन्‍द्र अनिकेत
अलगाव से लगाव तक : डॉ. दीप्ति गुप्‍ता
सम्‍मान के लिए समाजसेवा : कुबेर
अाखिरी पारी : भावसिंह हिरवानी
देवदासी : आलोक कुमार सातपुजे
उसी बिंदू पर लौटते हुए : सुरेश सर्वेद

बाल कथा
बिजली और तूफान

नैतिक कथा
जीवन का मूल्‍य
चार मोमबत्तियां
मकड़ी का जाला

व्यंग्य
सावधान, हम ईमानदार है : लतीफ घोंघी

लघुकथा
पार्टी
अपनी - अपनी किस्‍मत : शिवराज गुजर
पेंशन की तारीख

गीत / ग़ज़ल / कविता
' नवरंग' के मुक्‍तक
नोट की महिमा ( कविता ): सुशील यादव
गज़ल़ : अशोक ' अंजुम '
मेरा गॉव ( कविता ) : सुरेश सर्वेद
बस इतना ही ( कविता ) : रोजलीन
डॉ. कृष्‍ण कुमार सिंह ' मयंक ' की चार गज़लें
यशपाल जंघेल की कविताएं   
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ग्राम पंचायत करेला

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