इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

मंगलवार, 30 मई 2017

मई 2017 से जुलाई 2017

सम्पादकीय

आलेख

नारद की कल्‍याणकारी पत्रकारिता : लोकेन्‍द्र सिंह
यही तो मजदूर है : ललित साहू '' जख्‍मी ''


कहानी
घास काटने की मशीन : उपेन्‍द्रनाथ '' अश्‍क ''
रिसते घाव : बूटासिंह
अनंत यात्रा : नरेन्‍द्र अनिकेत
अलगाव से लगाव तक : डॉ. दीप्ति गुप्‍ता
सम्‍मान के लिए समाजसेवा : कुबेर
अाखिरी पारी : भावसिंह हिरवानी
देवदासी : आलोक कुमार सातपुजे
उसी बिंदू पर लौटते हुए : सुरेश सर्वेद

बाल कथा
बिजली और तूफान

नैतिक कथा
जीवन का मूल्‍य
चार मोमबत्तियां
मकड़ी का जाला

व्यंग्य
सावधान, हम ईमानदार है : लतीफ घोंघी

लघुकथा
पार्टी
अपनी - अपनी किस्‍मत : शिवराज गुजर
पेंशन की तारीख

गीत / ग़ज़ल / कविता
' नवरंग' के मुक्‍तक
नोट की महिमा ( कविता ): सुशील यादव
गज़ल़ : अशोक ' अंजुम '
मेरा गॉव ( कविता ) : सुरेश सर्वेद
बस इतना ही ( कविता ) : रोजलीन
डॉ. कृष्‍ण कुमार सिंह ' मयंक ' की चार गज़लें
यशपाल जंघेल की कविताएं   
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ग्राम पंचायत करेला

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