इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

मंगलवार, 23 मई 2017

नोट की महिमा

सशील यादव

जिन नोटन की बात करत हैं,उसकी महिमा अपरंपार
नोन.तेल,  राशन.पानी, खरीद फरोख्त ये अधार

बड़का नोट तिजौरी शोभा, छुटका लिपट रहे अखबार
सूना - सूना सब नेग भयो, दुआर. चार टीका बिसार

ननद न पूछे भौजाई को, देवर नखरे भुलय हजार
उतरे रिश्ते पालिश सारे, समय चाबुक पड़ी है मार

काले नोट तिजौरी रख लो, सफेद धर दो जग बगराय
इसी सोच के लोगन ही, घूमे.फिरते मुह लटकाय

बिना नोट के रोवन लागे, सकल बानिया.सेठ बजार
बिना नोट के कौन उतारे, तूफानी नदिया के पार

फील करते मरियल बइल सा, क्लर्क.अफसर नव - अवतार
खुशबू नोट जरा सूंघा दो, सरपट चले तेज रफ्तार

दाम, बढ़ती मंहगाई से, फर्क न लागे धुंआधार
जिनके घर धन.काला साथी, मिलता हो अकूत भंडार

नोट से सभी काम जुड़े हैं, चाहे कि पेंटर हो सुनार
जनता नारों फिर गूँज सुने मोहक.मनभावन सरकार

सुशील यादव

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें