इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

फरवरी 2018 से अप्रैल 2018

आलेख
छत्तीसगढ़ी पारंपरिक लोकगीतों का सामाजिक संदर्भ, लोकगीतों में लोक आकांक्षा - परंपरा की अभिव्यक्ति  - कुबेर
डॉ. पीसी लाल यादव के कविता म पीरित अउ पीरा के आरो  - यशपाल जंघेल
शोध आलेख
नरेश मेहता के उपन्यासÓ यह पथ बन्धु थाÓ में लोक सांस्कृतिक परिदृश्य के विविध रुप - शोधार्थी आशाराम साहू
Ó जमुनीÓ कहानी संग्रह में लोक जीवन और लोक संस्कृति - शोधार्थी जीतलाल
लोक गीतों में झलकती संस्कृति का प्रतीक होली - आत्माराम यादव Ó पीवÓ
  कहानी
संतगीरी - सनत कुमार जैन
अनुत्तरित - राकेश भ्रमर 
छत्तीसगढ़ी कहानी
फिरंतीन -शिवशंकर शुक्ल 
व्यंग्य
कवि, कहानी कब लिखता है - हरिशंकर परसाई   
अंग्रेजी लाल की हिन्दी - वीरेन्द्र Ó सरलÓ 
कविता/ गीत/ गजल
धरती के बेटा - पाठक परदेशी  (छत्तीसगढ़ी गीत),
धन - धन से मोर किसान - द्वारिका प्रसाद Ó विप्रÓ  (छत्तीसगढ़ी गीत)
लघुकथा
अंधी का बेटा
लघु व्यंग्य
अगले जनम मोहे कुतिया कीजो
बोध कथा
लोमड़ी की तरह नहीं, शेर की तरह बनो 

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